खोल कर खिड़की बैठी थी साली,
ताज़ी हवा खाने के लिए ।
हम भी हो गए सामने,
आँखों की प्यास बुझाने के लिए ।
आगे पढ़े : > > Jija Sali Ki Shayari in Hindi | जीजा साली की शायरी – मज़ेदार और नई शायरियाँ > >
मेरी आँखें नहीं, मस्ती के मैख़ाने हैं,
छलकते इस में, प्यार के पैमाने हैं ।
जब निकलती हूं, सुरमा डाल कर जीजा,
मुझ पर मरते कई दीवाने हैं ।
खत लिख रही हूं प्रेम से , दीदार करूंगी ।
हर जन्म में जीजा , तुझ से प्यार करूंगी ।
